1857 Revolution: Important Information , 1857 की क्रांति : महत्त्वपूर्ण जानकारी

1857 Revolution : महत्त्वपूर्ण जानकारी :- हेलो दोस्तों आज हम आपके साथ 1857 में भारत में जो क्रांति हुयी थी उसके बारे में बिस्तार से बताने जा रहे है । उम्मीद है आपको यह पोस्ट पसंद आएगी । यह पोस्ट हम इसलिए आपके साथ शेयर कर रहे है क्युकी 1857 की क्रांति के संबधी upsc , ias और ssc की परीक्षाओ में इसके संबधी 3-4 प्रेशन हर साल आते है । इस पोस्ट में आपको कोई पीडीऍफ़ नहीं बल्कि हमारे द्वारा खोज और बहुत अध्यन करने के बाद लिखी हुयी पोस्ट मिलेगी । जिसे पढ़ने के बाद आपको अच्छे से 1857 की क्रांति के बारे में पता चल जायेगा । तो चलिए अब 1857 की क्रांति के बारे में विस्तार से पढ़ते है ।

भारत से अंग्रेजों के शासन को हटाने का पहला संगठित प्रयास 1857 की महान क्रांति के रुप में सामने आया जिसे पहला स्वतंत्रता संग्राम कहा जाता है। भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की बढ़ती उपनिवेशवादी नीतियों एवं शोषण के खिलाफ इस आंदोलन ने अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी थी।

1857 Revolution

1857 Revolution

इस क्रांति की सबसे महत्वपूर्ण एवं पहली घटना बैरकपुर छावनी ( प. बंगाल ) में घटित हुई, जहां 29 मार्च 1857 को मंगल पांडे नाम के सिपाही ने गाय एवं सूअर की चर्बी से तैयार कारतूसों के प्रयोग से इनकार कर दिया और अपने उच्च अंग्रेज अधिकारी की हत्या कर दी। अंग्रेजी शासन ने 8 अप्रैल 1857 को मंगल पांडे एवं ईश्वर पांडे को फांसी की सजा दे दी। इन सैनिकों की मौत की खबर से इस विद्रोह ने भयंकर रूप ले लिया।

10 मई 1857 को मेरठ छावनी की पैदल सैन्य टुकड़ी ने भी इस कारतूसों विरोध कर दिया और अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का बिगुल बजा दिया। 12 मई 1857 को विद्रोहियों ने दिल्ली पर अधिकार कर दिया एवं बहादुरशाह जाफ़र द्वितीय को अपना सम्राट घोषित कर दिया। भारतीयों एवं अंग्रेजों के बीच हुए कड़े संघर्ष के बाद 20 सितम्बर 1857 को अंग्रेजों ने पुनः दिल्ली पर अधिकार कर लिया।

दिल्ली विजय का समाचार सुनकर देश के विभिन्न भागों में इस विद्रोह की आग फैल गई जिसमें – कानपुर, लखनऊ, बरेली, जगदीशपुर ( बिहार ) झांसी, अलीगढ, इलाहाबाद, फैजाबाद आदि प्रमुख केन्द्र थे।

केंद्र क्रन्तिकारी विद्रोह तिथि उन्मूलन तिथि व अधिकारी
दिल्ली बहादुरशाह जफर, बख्त खां 11,12 मई 1857 21 सितंबर 1857- निकलसन, हडसन
कानपुर नाना साहब, तात्या टोपे 5 जून 1857 6 सितंबर 1857 – कैंपबेल
लखनऊ बेगम हजरत महल 4 जून 1857 मार्च 1858 – कैंपबेल
झांसी रानी लक्ष्मीबाई जून 1857 3 अप्रैल 1858 – ह्यूरोज
इलाहाबाद लियाकत अली 1857 1858 – कर्नल नील
जगदीशपुर (बिहार ) कुँवर सिंह अगस्त 1857 1858 – विलियम टेलर , विंसेट आयर
बरेली खान बहादुर खां 1857 1858
फैजाबाद मौलवी अहमद उल्ला 1857 1858
फतेहपुर अजीमुल्ला 1857 1858 – जनरल रेनर्ड

 

1857 Revolution के प्रमुख कारण

– इस विद्रोह के प्रमुख कारणों में अंग्रेजों द्वारा भारतीयों पर किये गये सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक एवं राजनीतिक रुप से शोषण मुख्य हैं। लॉर्ड डलहौजी की व्यपगत नीति तथा वेलेजली की सहायक संधि से भारत की जनता में बहुत असंतोष था । चर्बी युक्त कारतूस ने लोगों की दिलों की आग को भड़काने का कार्य किया और यह पहला स्वाधीनता संग्राम के रूप में सामने आया।
– वेलेजली की सहायक संधि ने इस क्रांति को भड़काने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस संधि के अनुसार भारतीय राजाओं अपने राज्यों में कंपनी की सेना रखना पड़ता था । सहायक संधि से भारतीय राजाओं की स्वतंत्रता समाप्त होने लगी थी और राज्यों में कंपनी का हस्तक्षेप बढ़ने लगा था। अंग्रेजों ने पहली सहायक संधि अवध के नवाब के साथ की थी ।
सहायक संधि स्वीकार करने वाले राज्य – हैदराबाद , मैसूर , तंजौर , अवध , पेशवा ,बराड के भोंसले , सिंधिया , जोधपुर , जयपुर , मच्छेड़ी , बूंदी , भरतपुर।
– लाँर्ड डलहौजी की ‘ राज्य हड़प नीति ‘ या व्यपगत के सिद्धांत ( Doctrine of Lapse ) की वजह से भी भारतीयों में असंतोष व्याप्त था। हड़प नीति में अंग्रेजों ने हिन्दू राजाओं के पुत्र गोद लेने के अधिकार को समाप्त कर दिया था  तथा उत्तराधिकारी नहीं होने की स्थिति में राज्यों का विलय अंग्रेजी राज्यों में कर लिया जाता था।
भारतीय राज्यों के विलय होने से प्रमुख उच्च पदों पर अंग्रेजों की ही नियुक्ति की जाने लगी भारतीय को इससे वंचित कर दिया गया
– कृषि क्षेत्र में सुविधाओं के अभाव में उत्पादन क्षमता कम होने लगी थी लेकिन ब्रिटिश सरकार द्वारा अत्यधिक लगान एवं भू – कर  वसूला जा रहा था जिससे जनता आक्रोशित हो गई।
– भारत में धर्म सुधार के नाम पर ईसाई धर्म का प्रचार प्रसार एवं धर्मांतरण से भारतीयों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचीं।
– भारतीय सैनिकों को अंग्रेजों द्वारा मामूली वेतन दिया जाता था तथा उनकी पदोन्नति की कोई उम्मीद नहीं थी। जिस पद पर वह भर्ती होता उसी पद से सेवानिवृत्त भी होता था।
– लार्ड कैनिन द्वारा पारित अधिनियम के अनुसार सरकार भारतीय सैनिकों से सीमाओं के बाहर भी कार्य करवा सकती है जबकि समुद्र पार करना भारतीय समाज में धर्म विरुद्ध माना जाता था
– इस क्रांति का सबसे प्रमुख एवं तात्कालिक कारण एनफील्ड रायफल ( Enfield Rifle ) के  कारतूसों में चर्बी का प्रयोग होना था। इस राइफल के कारतूसों में गाय एवं सूअर की चर्बी का प्रयोग किया जाता था जिसे मुह से काटने के बाद प्रयोग किया जाता था इससे भारतीयों का धर्म भ्रष्ट हो सकता था। बैरकपुर छावनी से मंगल पांडे ने इसका विरोध किया जो धीरे धीरे पूरे देश में क्रांति के रुप में फैल गई।

विद्रोह के असफलता के कारण

अंग्रेजों के खिलाफ यह विद्रोह पूरे देश में फैल चुका था परन्तु फिर भी यह कुछ कारणों से पूर्ण रुप से सफल नहीं हो सका । इसकी असफलता के कुछ प्रमुख कारण निम्न हैं –
यह विद्रोह भारतीय क्रांतिकारियों द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ गुस्से में अचानक बिना किसी योजना एवं संगठन के अलग – अलग जगह एवं अलग – अलग समय में प्रारंभ हो गया था। जिसे अंग्रेजों को विद्रोह दबाने में आसानी हुई।
क्रांतिकारी के पास पुराने व परम्परागत हथियार थे जबकि अंग्रेजों की सेना के पास नए एवं आधुनिक हथियारों का भंडार था।
इस विद्रोह में कुछ भारतीय राजाओं ने बड़ चढ़कर हिस्सा लिया लेकिन कुछ ने इस विद्रोह में अंग्रेजों का साथ दिया जिनमें – ग्वालियर के सिंधिया, इंदौर के होल्कर, हैदराबाद के निजाम  , पटियाला के राजा आदि।

विद्रोह के प्रभाव

1857 की क्रांति को दिसंबर 1858 तक दबा दी गई और पुनः अंग्रेजों की सत्ता स्थापित हो गई लेकिन इस क्रांति से सम्पूर्ण अंग्रेजी शासन शासन की जड़ें हिल गई थी।
इस विद्रोह के बाद ब्रिटिश संसद में एक कानून पारित करके ईस्ट इंडिया कम्पनी के शासन का अंत कर दिया गया और भारत का शासन ब्रिटिश महारानी के हाथ में चला गया।
अंग्रेजों की सेना का फिर से पुनर्गठन किया गया जिससे ऐसी घटनाएं दोबारा न हो
भारतीयों को इस विद्रोह से काफी प्रेरणा मिली और लोगों ने समय समय पर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन किया । भारत की पूर्ण स्वतंत्रता तक यह संघर्ष लगातार चलता रहा।

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