Hindi Grammar Notes in Hindi Language PDF Free Download

Hindi Grammar Notes in Hindi Language PDF – आज हम आप सभी के लिए Hindi Grammar Notes in Hindi Language PDF लेकर आये हैं ये notes एकदिवसीय परीक्षा की तैयारी करने के लिए बहुत ही उपयोगी notes हैं. जैसे की आप सभी जानते ही हैं की ऐसी परीक्षाओं में Hindi Grammar से बहुत से प्रश्न पूछे जाते हैं.

अगर आप हमारी वेबसाइट के नये विजिटर हैं तो हम आपको बता दें कि हम यहाँ हर दिन इसी तरह का स्टडी मटेरियल लेकर आते हैं जो Competitive Exams के लिए उपयोगी होता है. अगर आप प्रतियोगी  परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो दोस्तों आप सभी इसका PDF नीचे दिए हुए बटन पर क्लिक करके आसान रूप से Download कर सकते हो. Hindi Grammar Notes in Hindi Language PDF

About Hindi Grammar Notes in Hindi Language PDF

इस हिन्दी ग्रामर बुक में आपको वर्ण, स्वर, व्यंजन, संज्ञा, वचन, कारक, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, काल, वाच्य, वाक्य,उपसर्ग, प्रत्यय, संधि, समास, अलंकार, शब्द, शब्द भेद, रचना के आधार पर, अर्थ के आधार पर, उत्तपत्ति के आधार पर, तत्सम एवं तद्भव, देशज शब्द, विदेशज शब्द, रुपान्तर के आधार पर, शब्दो मे अर्थ का बोध कराने वाली शक्तियॉ,

हिन्दी वर्णमाला, भाषा ,लिपि और व्याकरण, संज्ञा, सर्वनाम, वच, लिंग, क्रिया, विशेषण, कारक, काल, समास, अलंकार, पर्यायवाची, क्रियाविशेषण, विलोम शब्द, समुच्चयबोधक, सम्बन्धबोधक, विस्मयादिबोधक अव्यय,अनेक शब्दों के एक शब्द, प्रत्यय, हिंदी संख्या, मुहावरे, संधि, उपसर्ग, पत्र लेखन, निबंध लेखन, समरूप भिन्नार्थक शब्द, अव्यय, भाववाचक संज्ञा, तत्सम और तद्भव शब्द, रस, छंद, खड़ी बोली हिंदी का उद्भव व विकास अभ्यास प्रश्न आदि के बारे में उदाहरण सहित जानकारी पढ़ने को मिलेगी जो एक दिवसीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत उपयोगी और महत्वपूर्ण हैं.

व्याकरण (Grammar)की परिभाषा

व्याकरण- व्याकरण वह विद्या है जिसके द्वारा हमे किसी भाषा का शुद्ध बोलना, लिखना एवं समझना आता है। भाषा की संरचना के ये नियम सीमित होते हैं और भाषा की अभिव्यक्तियाँ असीमित। एक-एक नियम असंख्य अभिव्यक्तियों को नियंत्रित करता है। भाषा के इन नियमों को एक साथ जिस शास्त्र के अंतर्गत अध्ययन किया जाता है उस शास्त्र को व्याकरण कहते हैं।

वस्तुतः व्याकरण भाषा के नियमों का संकलन और विश्लेषण करता है और इन नियमों को स्थिर करता है। व्याकरण के ये नियम भाषा को मानक एवं परिनिष्ठित बनते हैं। व्याकरण स्वयं भाषा के नियम नहीं बनाता। एक भाषाभाषी समाज के लोग भाषा के जिस रूप का प्रयोग करते हैं, उसी को आधार मानकर वैयाकरण व्याकरणिक नियमों को निर्धारित करता है। अतः यह कहा जा सकता है कि- व्याकरण वह शास्त्र है, जिसके द्वारा भाषा का शुद्ध मानक रूप निर्धारित किया जाता है।

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