Indian Budget 2020 in Hindi : फायदे नुकसान की बात

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Indian Budget 2020 in Hindi:आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा बजट पेश किया हैं।  टैक्स स्लैब को लेकर बजट में बड़ा ऐलान किया है। 5 से 7.5 लाख रुपये की कमाई तक 10 फीसदी टैक्स देना होगा। 7.5 से 10 लाख रुपये की कमाई तक 15 फीसदी टैक्स देना होगा। 10 से 12.5 लाख रुपये की कमाई तक 20 फीसदी टैक्स देना होगा। 12.5-15 लाख रुपये तक की कमाई तक 25 फीसदी टैक्स देना होगा। आइए जानते हैं इस बजट के फायदे व नुकसान क्या है

Indian Budget 2020 in Hindi

सबसे लंबा भाषण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अब तक का सबसे लंबा भाषण दिया है। लगभग ढाई ढंटे के बाद उन्होंने बाकी भाषण सदन के पटल पर रख दिया। इससे पहले जसवंत सिंह ने 2003 में 2 घंटे 13 मिनट का भाषण दिया था।

इनकम टैक्स का नया स्लैब

टैक्स स्लैब को लेकर बजट में बड़ा ऐलान किया है। 5 से 7.5 लाख रुपये की कमाई तक 10 फीसदी टैक्स देना होगा। 7.5 से 10 लाख रुपये की कमाई तक 15 फीसदी टैक्स देना होगा। 10 से 12.5 लाख रुपये की कमाई तक 20 फीसदी टैक्स देना होगा। 12.5-15 लाख रुपये तक की कमाई तक 25 फीसदी टैक्स देना होगा।

आयकर

Indian Budget 2020 in Hindi; आयकर ढांचे में व्यापक बदलाव किए गए और नए स्लैब बना दिए हैं, लेकिन यह नए स्लैब के तहत टैक्स का भुगतान वही करदाता कर सकेंगे, जो पूर्व नियमों के तहत मिलने वाली छूट और कटौतियों को छोड़ देंगे. नए स्लैबों के तहत अब भी पांच लाख रुपये तक करयोग्य आय वालों को पहले की ही तरह कोई टैक्स नहीं देना होगा. पांच लाख रुपये से साढ़े सात लाख रुपये तक की करयोग्य आय पर अब पहले चुकाए जाते रहे 20 प्रतिशत की तुलना में सिर्फ 10 फीसदी टैक्स अदा करना होगा. साढ़े सात लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक की राशि पर पहले चुकाए जाते रहे 20 प्रतिशत की तुलना में सिर्फ 15 फीसदी टैक्स अदा करना होगा. 10 लाख से 12.5 लाख रुपये तक की करयोग्य आय पर पहले चुकाए जाते रहे 30 प्रतिशत की तुलना में सिर्फ 20 फीसदी टैक्स अदा करना होगा. 12.5 लाख से 15 लाख रुपये तक की करयोग्य आय पर पहले चुकाए जाते रहे 30 प्रतिशत की तुलना में सिर्फ 25 फीसदी टैक्स अदा करना होगा, और 15 लाख रुपये से अधिक की करयोग्य आय पर पहले की ही तरह 30 फीसदी टैक्स अदा करना होगा.

10 फीसदी जीडीपी का अनुमान

बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में बाजार मूल्य पर जीडीपी वृद्धि दर 10 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इसके साथ ही वित्त मंत्री ने कहा कि भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और केंद्र सरकार का कर्ज घटकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 48.7 प्रतिशत पर आ गया है. यह मार्च, 2014 में 52.2 प्रतिशत था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करते हुए कहा कि 2014-19 के दौरान औसत वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत से अधिक रही. इस दौरान औसत मुद्रास्फीति 4.5 प्रतिशत रही. 

LIC का हिस्सा बेचने का ऐलान

सरकार ने अपने विनिवेश कार्यक्रम के तहत देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में अपनी कुछ हिस्सेदारी आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिए बेचने की घोषणा की है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को लोकसभा में 2020-21 का बजट भाषण पढ़ते हुए यह प्रस्ताव किया. उन्होंने कहा कि एलआईसी को शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कराया जाएगा. वित्त मंत्री ने कहा कि सूचीबद्धता से कंपनियों में वित्तीय अनुशासन बढ़ता है. सीतारमण ने कहा कि सरकार का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिये एलआईसी में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव है. अभी एलआईसी की पूरी हिस्सेदारी सरकार के पास है.

करदाता चार्टर लाने का ऐलान

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के करदाताओं के लिए आम बजट में करदाता चार्टर लाने का बड़ा एलान किया है. वित्तमंत्री शनिवार को लोकसभा में आम बजट 2020-21 पेश कर रही थीं. उन्होंने कहा कि कर को लेकर किसी भी करदाता को परेशान नहीं किया जाएगा.

राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी का गठन

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नॉन गैजेट पोस्ट के लिए कॉमन टेस्ट करवाया जाएगा. कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से अराजपत्रित (नॉन गैजेटेड) पदों पर भर्ती के लिए राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी की स्थापना की जाएगी. वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी बैंकों की भर्ती प्रक्रिया में सुधार किया जाएगा.

शिक्षा पर 99300 करोड़ होंगे खर्च

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने शिक्षा क्षेत्र को 99,300 करोड़ आवंटित किए हैं. इनमें से 3 हजार करोड़ रुपये स्किल इंडिया प्रोग्राम के लिए है. पिछले साल की तुलना में सरकार ने इस साल शिक्षा बजट (Education Budget 2020-21) में 4,500 करोड़ रुपये की वृद्धि की है. पिछले साल सरकार ने शिक्षा बजट (Education Budget) के लिए 94,800 करोड़ आवंटित किए थे. पिछले 6 सालों में शिक्षा का बजट बढ़ा है. हालांकि सरकार के थिंक टैंक नीती अयोग के अनुसार, भारत को अगले दो वर्षों में शिक्षा पर जीडीपी का खर्च 6 फीसदी तक बढ़ाना चाहिए. 

निर्मला सीतारमण ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति जल्द ही लागू की जाएगी, सरकार को इसके लिए 2 लाख से अधिक सुझाव मिले हैं, जिन्हें नीति में शामिल किया जाएगा. बजट के दौरान सीतारमण ने घोषणा की कि हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे. इतना ही नहीं अल्पसंख्यक और वंचित युवाओं के लिए शीर्ष 100 एनआईआरएफ रैंकिंग संस्थानों द्वारा डिग्री स्तर ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा.

पिछले 6 सालों में शिक्षा के क्षेत्र में सरकार का बजट बढ़ा है. हर साल शिक्षा बजट में बढ़ोत्तरी हुई, हालांकि सबसे ज्यादा 2019-20 में 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई थी. आइये जानते हैं मोदी सरकार ने शिक्षा के लिए किस साल कितनी रकम आवंटित की.

पिछले 6 सालों का शिक्षा बजट (Education Budget)

2014-15: 55,115.1 करोड़ रुपये

2015-16: 68,968 करोड़ रुपये

2016-17: 72,394 करोड़ रुपये

2017-18: 79,685.95 करोड़ रुपये

2018-19: 85,010 करोड़ रुपये

2019-20: 93,847.64 करोड़ रुपये

2020-21: 99,300 करोड़ रुपये

बजट का लक्ष्य रोजगार, मजबूत कारोबार, महिलाओं का कल्याण

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि इस बजट का लक्ष्य लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना, कारोबार मजबूत करना और अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति/जनजाति की सभी महिलाओं की आकांक्षाओं को पूरा करना है. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है. सरकार ने 2014 से 2019 के दौरान राजकाज में व्यापक बदलाव किये हैं.

अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत, मुद्रास्फीति नियंत्रण में

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और बैंकों का बही खाता साफ सुथरा हुआ है. वित्त मंत्री ने शनिवार को वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करते हुए कहा कि हमारा मकसद लोगों की आय और खरीद क्षमता बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि 2014-19 के दौरान सरकार ने कामकाज के संचालन में बड़ा बदलाव किया है. उन्होंने माल एवं सेवा कर को ऐतिहासिक संरचनात्मक सुधार करार देते हुए कहा कि इससे देश आर्थिक रूप में एकीकृत हुआ है.


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