UPSC History Optional Subject Syllabus in Hindi For IAS Examination Free PDF

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UPSC History Optional Subject Syllabus in Hindi For IAS Examination – In order to further improve the competitive examination, today we have UPSC History Optional Subject Syllabus in Hindi For IAS Examination. where questions are often asked in competitive examinations. If you are preparing for SSC, BANK, RAILWAY, IAS and other competitive exams, then this note will be very useful for all of you.

UPSC History Optional Subject Syllabus in Hindi For IAS Examination

UPSC History Optional Subject Syllabus in Hindi For IAS Examination जैसा की आप लोग जानते है की UPSC Prelims परीक्षा पास करने के बाद आप लोगो को UPSC Mains Exam देना पड़ता है जिसमे आपको एक विषय को वैकल्पिक विषय (Optional Subject) के रूप में चयन करना होता है| दोस्तों आज हम जो पोस्ट लिख रहें है उसमे हम आप लोगो को UPSC History Optional Subject Syllabus के बारे में बतायेंगे| जिसमे आप लोगो को कुल 2 पेपर को हल करना होता है| छात्रो History Paper-1 और History Paper-2 के Syllabus के बारे में विस्तार से नीचे लिखा गया है, जिसे आप सभी छात्र Laptop/Mobile और Tablet में आसानी से पढ़ सकते है|

About UPSC History Optional Subject Syllabus

प्रश्न पत्र-1 (Paper-I)

1- स्त्रोत:-

पुरातात्विक स्त्रोत;

अन्वेषण, उत्खनन, पुरालेखविद्या, मुद्राशास्त्र, स्मारक|

साहित्यिक स्त्रोत;

स्वदेशी; प्राथमिक एवं द्वितीयक; कविता, विज्ञान साहित्य, साहित्य, क्षेत्रीय भाषाओ का साहित्य, धार्मिक साहित्य|

विदेशी वर्णन; यूनानी, चीनी एवं अरब लेखक

2- प्रागैतिहास एवं आद्य इतिहास:-

भौगोलिक कारक| शिकार एवं संग्रहण (पुरापाषाण एवं मध्यपाषाण युग); कृषि का आरंभ (नवपाषाण एवं ताम्रपाषाण युग)|

3- सिन्धु घाटी सभ्यता:-

उदम, काल, विस्तार, विशेषताएं, पतन, अस्तित्व एवं महत्व, कला एवं स्थापत्य|

4- महापाषाणयुगीन संस्कृतियाँ:-

सिन्धु से बाहर पशुचारण एवं कृषि संस्कृतियों का विस्तार, सामुदायिक जीवन का विकास, बस्तियां, कृषि का विकास, शिल्पकर्म, मृदभांड एवं लोह उद्योग|

5- आर्य एवं वैदिक काल:-

भारत में आर्यों का प्रसार|

वैदिक काल; धार्मिक एवं दार्शनिक साहित्य; ऋगवैदिक काल से उत्तर वैदिक काल तक हुए रूपांतरण; राजनैतिक, सामाजिक एवं आर्थिक जीवन; वैदिक युग का महत्व; राजतन्त्र एवं वर्ण व्यवस्था का क्रम विकास|

6- महाजनपद काल:-

महाजनपदो का निर्माण; गणतंत्रीय एवं राजतंत्रीय; नगर केन्द्रों का उदभव; व्यापार मार्ग; आर्थिक विकास टंकण (सिक्का ढिलाई); जैन धर्म एवं बौध धर्म का प्रसार; मगधो एवं नन्दों का उदभव| ईरानी एवं नन्दों का उदभव|

7- मौर्य साम्राज्य:-

मौर्य साम्राज्य की नीव, चन्द्रगुप्त, कौटिल्य और अर्थशास्त्र; अशोक; धर्म की संकल्पना; धर्मादेश; राज्य व्यवस्था; प्रशासन; अर्थव्यवस्था; कला, स्थापत्य एवं मूर्तिशिल्प; विदेशी संपर्क; धर्म का प्रसार; साहित्य|

साम्राज्य का विघटन; शुंग एवं कंव

8- उत्तर मौर्य काल (भारत यूनानी, शक, कुषाण, पश्चिमी क्षत्रप):-

बाहरी विश्व से संपर्क; नगर-केन्द्रों का विकास, अर्थ-व्यवस्था, टंकण, धर्मो का विकास, महायान, सामाजिक दशाएं, कला, स्थापत्य, संस्कृति, साहित्य एवं विज्ञान|

9- प्रारंभिक राज्य एवं समाज; पूर्वी भारत, दकन एवं दक्षिण भारत में:-

खारवेल, सातवाहन, संगमकालीन तमिल राज्य; प्रशासन, अर्थ-व्यवस्था, भूमि, अनुदान, टंकण, व्यापारिक श्रेणियां एवं नगर केंद्र; बौध केंद्र, संगम साहित्य एवं संस्कृति; कला एवं स्थापत्य|

10- गुप्त वंश, वाकाटक एवं वर्धन वंश:-

राज्य व्यवस्था एवं प्रशासन, आर्थिक दशाएं, गुप्तकालीन टंकण, भूमि अनुदान, नगर केन्द्रों का पतन, भारतीय सामंतशाही, जाति प्रथा, स्त्री की स्थिति, शिक्षा एवं शैक्षिक संस्थाएं; नालन्दा, विक्रमशिला एवं बल्लभी, साहित्य, विज्ञान साहित्य, कला एवं स्थापत्य|

11- गुप्तकालीन क्षेत्रीय राज्य:-

कन्दबवंश, पल्लववंश, बदमी का चालुक्यवंश; राज्य व्यवस्था एवं प्रशासन, व्यापारिक श्रेणियां, साहित्य; वैष्णव एवं शैव धर्मो का विकास| तमिल भक्ति आन्दोलन, शंकराचार्य; वेदांत; मंदिर संस्थाएं एवं मंदिर स्थापत्य; पाल वंश, सेन वंश, राष्ट्रकूट वंश, परमार वंश, राज्य व्यवस्था एवं प्रशासन; सांस्कृतिक पक्ष| सिंध के अरब विजेता; अलबरूनी, कल्याण का चालुक्य वंश, चोल वंश, होयसल वंश, पाण्ड्य वंश; राज्य व्यवस्था एवं प्रशासन; स्थानीय शासन; कला एवं स्थापत्य का विकास, धार्मिक संप्रदाय, मंदिर एवं मठ संस्थाएं, अग्रहार वंश, शिक्षा एवं साहित्य, अर्थ-व्यवस्था एवं समाज|

12- प्रारंभिक भारतीय सांस्कृतिक इतिहास के प्रतिपाद्य:-

भाषाएँ एवं मूलग्रन्थ, कला एवं स्थापत्य के क्रम विकास के प्रमुख चरण, प्रमुख दार्शनिक चिन्तक एवं शाखाएँ, विज्ञान एवं गणित के क्षेत्र में विचार|

13- प्रारंभिक मध्यकालीन भारत, 750-1200:-

  • राज्य व्यवस्था; उत्तरी भारत एवं प्रायद्वीप में प्रमुख राजनैतिक घटनाक्रम, राजपूतों का उद्गम एवं उदय
  • चोल वंश; प्रशासन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं समाज
  • भारतीय सामंतशाही
  • कृषि अर्थ- व्यवस्था एवं नगरीय बस्तियां
  • व्यापार एवं वाणिज्य
  • समाज; ब्राह्रमण की स्थिति एवं नई सामाजिक व्यवस्था
  • स्त्री की स्थिति
  • भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी|

14- भारत की सांस्कृतिक परंपरा 750-1200:-

  • दर्शन; शंकराचार्य एवं वेदांत, रामानुज एवं विशिष्टाद्वैत, मध्य एवं ब्रह्मा-मीमांसा|
  • धर्म; धर्म के स्वरूप एवं विशेषताएँ, तमिल भक्ति, संप्रदाय, भक्ति का विकास, इस्लाम एवं भारत में इसका आगमन, सूफी मत|
  • साहित्य; संस्कृत साहित्य, तमिल साहित्य का विकास, नवविकासशील भाषाओ का साहित्य, कल्हण की “राजतरंगिनी”, अलबरूनी का “इंडिया”|
  • कला एवं स्थापत्य; मंदिर स्थापत्य, मूर्तिशिल्प, चित्रकला|

15- तेरहवीं शताब्दी:-

  • दिल्ली सल्तनत की स्थापना; गौरी के आक्रमण-गौरी की सफलता के पीछे कारक
  • आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिणाम
  • दिल्ली सल्तनत की स्थापना एवं प्रारंभिक तुर्क सुल्तान
  • सुदृढ़ीकरण; इल्तुतमिश और बलबन का शासन|

16- चौदहवीं शताब्दी:-

  • खिलजी क्रांति
  • अलाउद्दीन खिलजी; विजय एवं क्षेत्र-प्रसार, कृषि एवं आर्थिक उपाय
  • मुहम्मद तुगलक; प्रमुख प्रकल्प, कृषि उपाय, मुहम्मद तुगलक की अफसरशाही|
  • फिरोज तुगलक; कृषि उपाय, सिविल इंजीनियरी एवं लोक निमार्ण में उपलब्धियां, दिल्ली सल्तनत का पतन, विदेशी संपर्क एवं इब्नबतूता का वर्णन|

17- तेरहवीं एवं चौदहवीं शताब्दी का समाज, संस्कृति एवं अर्थव्यवस्था:-

  • समाज; ग्रामीण समाज की रचना, शासी वर्ग, नगर निवासी, स्त्री, धार्मिक वर्ग, सल्तनत के अंतर्गत जाति एवं दास प्रथा, भक्ति आन्दोलन, सूफी आन्दोलन|
  • संस्कृति; फारसी साहित्य, उत्तर भारत की क्षेत्रीय भाषाओ का साहित्य, दक्षिण भारत की भाषाओ का साहित्य, सल्तनत स्थापत्य एवं नए स्थापत्य रूप, चित्रकला, सम्मिश्र संस्कृति का विकास|
  • अर्थ व्यवस्था; कृषि उत्पादन, नगरीय अर्थव्यवस्था एवं कृषीतर उत्पादन का उदभव, व्यापार एवं वाणिज्य|

18- पंद्रहवीं एवं प्रारंभिक सोलहवीं शताब्दी-राजनैतिक घटनाक्रम एवं अर्थव्यवस्था:-

  • प्रांतीय राजवंशो का उदय; बंगाल, कश्मीर (जैनल आवदीन), गुजरात, मालवा, बहमनी
  • विजयनगर साम्राज्य
  • लोदी वंश
  • मुग़ल साम्राज्य, पहला चरण; बाबर एवं हुमायूँ
  • सूर साम्राज्य; शेरशाह का प्रशासन
  • पुर्तगाली औपनिवेशिक प्रतिष्ठान|

19- पंद्रहवीं एवं प्रारंभिक सोलहवीं शताब्दी-समाज एवं संस्कृति:-

  • क्षेत्रीय सांस्कृतिक विशिष्टताएं
  • साहित्यक परम्पराएँ
  • प्रांतीय स्थापत्य
  • विजयनगर साम्राज्य का समाज, संस्कृति, साहित्य और कला|

20- अकबर:-

  • विजयी एवं साम्राज्य का सुदृढ़ीकरण
  • जागीर एवं मनसब व्यवस्था की स्थापना
  • राजपूत नीति
  • धार्मिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण का विकास, सुलह-ए-कुल का सिद्धांत एवं धार्मिक नीति|
  • कला एवं प्रौद्योगिकी को राज-दरबारी संरक्षण|

21- सत्रहवीं शताब्दी में मुग़ल साम्राज्य:-

  • जहाँगीर, शाहजहाँ एवं औरंगजेब की प्रमुख प्रशासनिक नीतियां
  • साम्राज्य एवं जमीदार
  • जहाँगीर, शाहजहाँ एवं औरंगजेब की धार्मिक नीतियां
  • मुग़ल राज्य का स्वरूप
  • उत्तर सत्रहवीं शताब्दी का संकट एवं विद्रोह
  • अहोम साम्राज्य
  • शिवाजी एवं प्रारंभिक मराठा राज्य|

22- सोलहवीं एवं सत्रहवीं शताब्दी में अर्थव्यवस्था एवं समाज:-

  • जनसंख्या, कृषि उत्पादन, शिल्प उत्पादन
  • नगर, डच, अंग्रेजी एवं फ्रांसीसी कंपनियों के माध्यम से यूटोप के साथ वाणिज्य; “व्यापार क्रांति”
  • भारतीय व्यापारी वर्ग, बैंकिंग, बीमा एवं ऋण प्रणालियाँ
  • किसानों की दशा, स्त्रियों की दशा
  • सिख समुदाय एवं खालसा पंथ का विकास

23- मुग़ल साम्राज्यकालीन संस्कृति:-

  • फ़ारसी इतिहास एवं अन्य साहित्य
  • हिंदी एवं अन्य धार्मिक साहित्य
  • मुग़ल स्थापत्य
  • मुग़ल चित्रकला
  • प्रांतीय स्थापत्य एवं चित्रकला
  • शास्त्रीय संगीत
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी|

24- अठारहवीं शताब्दी:-

  • मुग़ल साम्राज्य के पतन के कारक
  • क्षेत्रीय सामंत देश; निजाम का दकन, बंगाल, अवध
  • पेशवा के अधीन मराठा उत्कर्ष
  • मराठा राजकोषीय एवं वित्तीय व्यवस्था
  • अफगान शक्ति का उदय, पानीपत का युद्ध-1761
  • ब्रिटिश विजय की पूर्व संध्या में राजनीति, संस्कृति एवं अर्थव्यवस्था की स्थिति|

UPSC History Optional Subject Syllabus – Paper -II

प्रश्न पत्र-2 (Paper-Il) 

1- भारत में यूरोप का प्रदेश:-

प्रारंभिक यूरोपीय बस्तियां; पुर्तगाली एवं डच, अंग्रेजी एवं फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी; अधिपत्य के लिए उनके युद्ध; कर्नाटक युद्ध; बंगाल-अंग्रेजो एवं बंगाल के नबाब के बीच संघर्ष; सिराज और अंग्रेज, प्लासी का युद्ध; प्लासी का महत्व|

2- भारत में ब्रिटिश प्रसार:-

बंगाल-मीर जाफर एवं मीर कासिम; बक्सर का युद्ध; मैसूर; मराठा; तीन अंग्रेज-मराठा युद्ध; पंजाब|

3- ब्रिटिश राज की प्रारंभिक संरचना:-

प्रारंभिक प्रशासनिक संरचना; द्वैशासन से प्रत्यक्ष नियंत्रक तक; रेगुलेटिंग एक्ट (1773); पिट्स इंडिया एक्ट (1784); चार्टर एक्ट (1833); मुफ्त व्यापार का स्वर एवं ब्रिटिश औपनिवेशक शासन का बदलता स्वरूप; अंग्रेजी उपयोगितावादी और भारत|

4- ब्रिटिश औपनिवेशक शासन का आर्थिक प्रभाव:-

1- ब्रिटिश भारत में भूमि-राजस्व बंदोबस्त; स्थायी बंदोबस्त; रैयतवारी बंदोबस्त; महालबारी बंदोबस्त; राजस्व प्रबंध का आर्थिक प्रभाव; कृषि का वाणिज्यीकरण; भूमिहीन कृषि श्रमिकों का उदय; ग्रामीण समाज का परिक्षनण|

2- पारंपरिक व्यापार एवं वाणिज्य का विस्थापन; अनौद्योगीकरण; पारंपरिक शिल्प की अवनति; धन का अपवाह; भारत का आर्थिक रूपांतरण; टेलीग्राफ एवं डाक सेवाओं समेत रेल पथ एवं संचार जाल; ग्रामीण भीतरी प्रदेश में दुर्भिक्ष एवं गरीबी; यूरोपीय व्यापार उद्यम एवं इसकी सीमाएं|

5- सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास:-

स्वदेशी शिक्षा की स्थिति; इसका विस्थापन; प्रच्चाविद-आंग्लविद विवाद, भारत में पश्चिमी शिक्षा का प्रदर्भाव; प्रेस, साहित्य एवं लोकमत का उदय; आधुनिक मातृभाषा साहित्य का उदय; विज्ञान की प्रगति; भारत में क्रिश्चियन मिशनरी के कार्यकलाप|

6- बंगाल एवं अन्य क्षेत्रो में सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आन्दोलन:-

राममोहन राय, बह्रा आन्दोलन; देवेन्द्रनाथ टैगोर; ईश्वरचंद्र विद्यासागर; युवा बंगाल आन्दोलन; दयानंद सरस्वती; भारत में सटी, विधवा विवाह, बाल विवाह, आदि समेत सामाजिक सुधार आन्दोलन, आधुनिक भारत के विकास में भारतीय पुनर्जागरण का योगदान; इस्लामी पुनरुद्धार वृत्ति-फराइजी एवं वहाबी आन्दोलन|

7- ब्रिटिश शासन के प्रति भारत की अनुक्रिया:-

रंगपुर ढीग (1783), कोल विद्रोह (1832), मालाबार में मोपला विद्रोह (1841-1920), संथाल हुल (1855), नील विद्रोह (1859-60), दकन विप्लव (1875), एवं मुंडा विद्रोह उल्गुलान (1899-1900) समेत 18वीं एवं 19वीं शताब्दी में हुए किसान आन्दोलन एवं जनजातीय विल्पव; 1857 का महाविद्रोह-उद्गम, स्वरूप, असफलता के कारण, परिणाम; पश्व 1857 काल में किसान विल्पव के स्वरूप में बदलाव; 1920 और 1930 के दशको में हुए किसान आन्दोलन|

8- 

भारतीय राष्ट्रवाद के जन्म के कारक; संघो की राजनीति; भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बुनियाद; कांग्रेस के जन्म के संबंध में सेफ्टी वाल्व का पक्ष; प्रारंभिक कांग्रेस के कार्यक्रम एवं लक्ष्य; प्रारंभिक कांग्रेस नेतृत्व की सामाजिक रचना; नरम दल एवं गरम दल; बंगाल का विभाजन (1905); बंगाल में स्वदेशी आन्दोलन; स्वदेशी आन्दोलन के आर्थिक एवं राजनैतिक परिप्रेक्ष्य; भारत में क्रांतिकारी उग्रपंथ का आरम्भ|

9-

गाँधी का उदय; गाँधी के राष्ट्रवाद का स्वरूप; रीलेट सत्याग्रह; गाँधी का जनाकर्षण; खिलाफत आन्दोलन; असहयोग आन्दोलन; असहयोग आन्दोलन समाप्त होने के बाद से सविनय अवज्ञा आन्दोलन के प्रारंभ होने तक की राष्ट्रीय राजनीति; सविनय अवज्ञा आदोलन के दो चरण; साइमन कमीशन; नेहरू रिपोर्ट; गोलमेज परिषद्; राष्ट्रवाद और किसान आन्दोलन; राष्ट्रवाद एवं श्रमिक वर्ग आदोलन; महिला एवं भारतीय युवा तथा भारतीय राजनीति में छात्र (1885-1947); 1937 का चुनाव तथा मंत्रालयों का गठन; क्रिप्स मिशन; भारत छोड़ो आन्दोलन; वैरेल योजना; कैबिनेट मिशन|

10-

औपनिवेशिक भारत में 1858 और 1935 के बीच सांविधानिक घटनाक्रम|

11- राष्ट्रीय आन्दोलन की अन्य कड़ियाँ:-

क्रांतिकारी; बंगाल, पंजाब, महाराष्ट्र, यूपी., मध्य प्रदेश, भारत से बाहर| वामपक्ष; कांग्रेस के अन्दर का वामपक्ष; जवाहर लाल नेहरू, सुभाषचंद्र बोस, कांग्रेस समाजवादी पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, अन्य वामदल|

12- 

अलगाववाद की राजनीति; मुस्लिम लीग; हिन्दू महासभा सांप्रदायिकता एवं विभाजन की राजनीति; सत्ता का हस्तांतरण; स्वतंत्रता|

13- 

एक राष्ट्र के रूप में सुदृढीकरण; नेहरू की विदेश नीति भारत और उसके पड़ोसी (1947-1964) राज्यों का भाषावाद पुनर्गठन (1935-1947); क्षेत्रीयतावाद एवं क्षेत्रीय असमानता; भारतीय रियासतों का एकीकरण; निर्वाचन की राजनीति में रियासतों के नरेश (प्रिंस); राष्ट्रीय भाषा का प्रश्न|

14-

1947 के बाद जाति एवं नृजातित्व; उत्तर औपनिवेशक निर्वाचन-राजनीति में पिछड़ी जातियां एवं जनजातियाँ; दलित आन्दोलन|

15-

आर्थिक विकास एवं राजनीति परिवर्तन; भूमि सुधार; योजना एवं ग्रामीण पुनर्रचना की राजनीति; उत्तर औपनिवेशक भारत में पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण नीति; विज्ञान की तरक्की|

16- प्रबोध एवं आधुनिक विचार:-

  1. प्रबोध के प्रमुख विचार; कांट रूसो
  2. उपनिवेशों में प्रबोध-प्रसार
  3. समाजवादी विचारो का उदय (माकर्स तक); माकर्स के समाजवाद का प्रसार|

17- आधुनिक राजनीति के मूल स्त्रोत:-

  1. यूरोपीय राज्य प्रणाली
  2. अमेरिका क्रांति एवं संविधान
  3. क्रंसीसी क्रांति एवं उसके परिणाम, 1789-1815
  4. अब्राहम लिंकन के सन्दर्भ के साथ अमरीकी सिविल युद्ध एवं दासता का उन्मूलन
  5. ब्रिटिश गणतंत्रात्मक राजनीति, 1815-1850; संसदीय सुधार, मुफ्त व्यापारी, चार्टरवादी|

18- औद्योगिकीकरण:-

  1. अंग्रेजी औद्योगिक क्रांति; कारण एवं समाज पर प्रभाव
  2. अन्य देशो में औद्योगिकीकरण; यू.एस.ए., जर्मनी, रूस, जापान
  3. औद्योगिकीकरण एवं भूमंडलीकरण|

19- राष्ट्र राज्य प्रणाली:-

  1. 19वीं शताब्दी में राष्ट्रवाद का उदय
  2. राष्ट्रवाद; जर्मनी और इटली में राज्य निर्माण
  3. पूरे विश्व में राष्ट्रीयता के आविर्भाव के समक्ष साम्राज्यों का विघटन|

20-  साम्राज्यवाद एवं उपनिवेशवाद:-

  1. दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया
  2. लातीनी अमरीकी एवं दक्षिणी अफ्रीका
  3. ऑस्ट्रेलिया
  4. साम्राज्यवाद एवं मुफ्त व्यापार; नवसाम्राज्यवाद का उदय|

21- क्रांति एवं प्रतिक्रांति:-

  1. 19वीं शताब्दी यूरोपीय क्रांतियाँ
  2. 1917-1921 की रुसी क्रांति
  3. फासीवाद प्रतिक्रांति, इटली एवं जर्मनी
  4. 1949 की चीनी क्रांति|

22- विश्व युद्ध:-

  1. सम्पूर्ण युद्ध के रूप में प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध; समाजीय निहितार्थ
  2. प्रथम विश्व युद्ध; कारण एवं परिणाम
  3. द्वितीय विश्व युद्ध; कारण एवं परिणाम

23- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का विश्व:-

  1. दो शक्तियों का आविर्भाव
  2. तृतीय विश्व एवं गुटनिरपेक्षता का आविर्भाव
  3. संयुक्त राष्ट्र संघ एवं वैश्विक विवाद|

24- औपनिवेशक शासन से मुक्ति:-

  1. लातीनी अमरीकी-बोलीवर
  2. अरब विश्व-मिश्र
  3. अफ्रीका रंगभेद से गणतंत्र तक
  4. दक्षिण पूर्व एशिया-वियतनाम|

25- वि-औपनिवेशीकरण एवं अल्पविकास:-

  • विकास के बाधक कारक; लातीनी, अमरीकी, अफ्रीका

26- यूरोप का एकीकरण:-

  1. युद्धोत्तर स्थापनाएं; NATO एवं यूरोपीय समुदाय (यूरोपियन कम्युनिटी)
  2. यूरोपीय समुदाय (यूरोपियन कम्युनिटी) का सुदृढ़ीकरण एवं प्रसार
  3. यूरोपियाई संघ|

27- सोवियत यूनियन का विघटन एवं एक ध्रुवीय विश्व का उदय:-

  1. सोवियत साम्यवाद एवं सोवियत यूनियन को निपात तक पहुँचाने वाले कारक, 1985-1991
  2. पूर्वी यूरोप में राजनैतिक परिवर्तन 1989-2001
  3. शीत युद्ध का अंत एवं अकेली महशक्ति के रूप में US का उत्कर्ष|

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